बद्रीनाथ- VIP दर्शन से 1.63 करोड़ की आय पर विवाद:उपाध्यक्ष बोले- बिना बोर्ड मंजूरी के शुल्क लागू किया; चढ़ावा के बाद दो नए मामले चर्चा में

09 Jul 2026

बद्रीनाथ धाम में चढ़ावा हेराफेरी विवाद अभी शांत भी नहीं हुआ है कि अब दो नए वित्तीय मामले चर्चा में आ गए हैं। पहला मामला VIP दर्शन के लिए प्रति श्रद्धालु 1100 रुपए शुल्क वसूलने का है, जिससे अब तक करीब 1.63 करोड़ रुपए जमा होने का दावा किया जा रहा है।

दूसरा मामला VIP मेहमानों के ठहरने और खानपान के नाम पर कथित फर्जी बिल बनाए जाने का है। दोनों मामलों को लेकर श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के भीतर ही मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती ने बोर्ड की मंजूरी के बिना शुल्क लागू करने पर सवाल उठाए हैं, जबकि CEO सोहन सिंह रांगड़ का कहना है कि यह व्यवस्था भीड़ नियंत्रण और अनधिकृत वसूली रोकने के लिए लागू की गई थी।

जून के अंतिम सप्ताह से लागू हुई व्यवस्था

चारधाम यात्रा के पीक सीजन में बद्रीनाथ धाम में रोज हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे थे। इसी दौरान कुछ श्रद्धालुओं को सामान्य कतार से अलग विशेष व्यवस्था के तहत दर्शन कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसके लिए प्रति व्यक्ति 1100 रुपए शुल्क लिया गया और आधिकारिक रसीद भी जारी की गई।

विवाद तब शुरू हुआ जब यह सवाल उठा कि इस शुल्क को लागू करने से पहले BKTC बोर्ड से औपचारिक मंजूरी ली गई थी या नहीं।

CEO बोले- पारदर्शिता के लिए किया व्यवस्थित

BKTC के मुख्य कार्याधिकारी (CEO) सोहन सिंह रांगड़ का कहना है कि VIP दर्शन शुल्क कोई नई व्यवस्था नहीं थी, बल्कि पहले से चली आ रही प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया गया।

उनके अनुसार यात्रा सीजन में बड़ी संख्या में लोग विभिन्न माध्यमों से प्रोटोकॉल या VIP श्रेणी में दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जिससे सामान्य श्रद्धालुओं की कतार और भीड़ प्रबंधन प्रभावित होता है।

रांगड़ ने कहा कि इसी वजह से मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत शुल्क आधारित व्यवस्था लागू की गई, ताकि VIP प्रोटोकॉल का अनावश्यक उपयोग रोका जा सके और भीड़ को नियंत्रित रखा जा सके।

उन्होंने यह भी कहा कि शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ बाहरी लोग दिव्यांग और अन्य विशेष श्रेणियों का दुरुपयोग कर श्रद्धालुओं से पैसे लेकर वैकल्पिक रास्तों से दर्शन करा रहे थे। इस पर रोक लगाने के लिए अधिकृत और रसीद आधारित व्यवस्था लागू की गई।

CEO के मुताबिक प्रत्येक श्रद्धालु को आधिकारिक रसीद जारी की गई और पूरी राशि सीधे समिति के खाते में जमा हुई है। उन्होंने दावा किया कि अब तक लगभग 1.63 करोड़ रुपए समिति के खाते में जमा हो चुके हैं और पूरी प्रक्रिया दस्तावेजों में दर्ज है।