वैभव सू्र्यवंशी के लिए इंग्लैंड में अलग चेंजिंग रूम होगा:टीम मीटिंग और खेल के दौरान ही सीनियर्स साथ रहेंगे, ICC नियमों के तहत फैसला

24 Jun 2026

15 साल के वैभव सूर्यवंशी इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे पर टीम के बाकी खिलाड़ियों से अलग चेंजिंग रूम इस्तेमाल करेंगे। सूर्यवंशी के लिए यह फैसला ICC और इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) की अंडर-16 खिलाड़ियों से जुड़ी सेफगार्डिंग पॉलिसी के तहत लिया गया है।

हालांकि सूर्यवंशी मैचों के दौरान भारतीय प्लेयर्स के साथ रह सकेंगे और टीम मीटिंग्स का भी हिस्सा होंगे। उन्हें कपड़े बदलने के लिए अलग चेंजिंग रूम और वॉशरूम का इस्तेमाल करना होगा। ICC ने यह नियम 2019 में लागू किया था।

भारत-आयरलैंड टी-20 सीरीज 26 जून से होनी है। इसके बाद एक जुलाई से भारतीय टीम इंग्लैंड में 5 टी-20 और 3 वनडे मैच खेलेगी।

फुटबॉलर मैक्स को अलग चेजिंग रूम मिला था

इंग्लिश क्लब आर्सेनल के फुटबॉलर मैक्स डोमैन को दिसंबर 2025 में टीम के अन्य खिलाड़ियों से अलग चेंजिंग रूम का इस्तेमाल करना पड़ता था। उस वक्त उनकी उम्र 15 साल थी।

क्यों बने नाबालिग खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए सख्त नियम?

खेलों में चाइल्ड सेफगार्डिंग नियम अचानक नहीं बने। सालों तक खेल अकादमियों, ड्रेसिंग रूम और ट्रेनिंग सेंटरों में नाबालिग खिलाड़ियों के साथ यौन शोषण, मानसिक प्रताड़ना के कई मामले सामने आए।

इन घटनाओं ने खेल जगत को हिला कर रख दिया, जिसके बाद फीफा, इंटरनेशनल ओलिंपिक कमेटी को ‘लॉकर रूम बैन’ और ‘नो 1-ऑन-1’ जैसे सख्त नियम बनाने पड़े।

ओलिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट तक हुई हैं यौन शोषण का शिकार

  • 2016- ब्रिटिश फुटबॉल का यौन शोषण कांड इंग्लैंड के पूर्व फुटबॉलर एंडी वुडवर्ड ने खुलासा किया कि जब वे 1980 के दशक में क्रू अलेक्जेंड्रा क्लब में एक युवा खिलाड़ी थे, तब उनके कोच बैरी बेनेल ने उनका यौन उत्पीड़न किया था। इसके बाद 350 से अधिक पूर्व खिलाड़ियों ने सामने आकर मैनचेस्टर सिटी, न्यूकैसल और चेल्सी जैसे बड़े क्लबों के कोचों पर शोषण के आरोप लगाए।
  • 2016- अमेरिकी जिम्नास्टिक का लैरी नासर कांड अमेरिकी जिम्नास्टिक के आधिकारिक डॉक्टर लैरी नासर ने ओलिंपिक गेम्स और नेशन ट्रेनिंग के दौरान लगभग 20 सालों तक 250 से अधिक युवा और नाबालिग महिला एथलीटों का यौन उत्पीड़न किया। पीड़ितों में वर्ल्ड और ओलंपिक मेडल जीतने वाली जिम्नास्ट सिमोन बाइल्स भी शामिल थी। लैरी नासर अक्सर इलाज या फिजियोथेरेपी के बहाने नाबालिग खिलाड़ियों को बंद कमरे में अकेला बुलाता था, जहां माता-पिता या टीम अधिकारियों का जाना वर्जित होता था।