संजीव कुमार की एक शर्त और हेमा से शादी टूटी:गर्लफ्रेंड्स को नंबर से बुलाते थे, सुलक्षणा पंडित मंदिर ले जाकर बोलीं- मांग भर दो

महाराष्ट्र 09 Jul 2026

1933 के आसपास की बात है। महाराष्ट्र और गुजरात की सीमा के पास स्थित माता रानी के एक मंदिर में एक महिला पहुंची। मान्यता थी कि यहां सच्चे मन से मांगी गई कोई भी मुराद कभी खाली नहीं जाती। महिला की बस एक ही कामना थी-एक बेटे की।

उसने माता रानी के चरणों में सिर झुकाकर मन्नत मांगी, ‘अगर मुझे पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, तो मैं उसे दस साल तक उधार मांगकर लाए गए कपड़े ही पहनाऊंगी।’

समय बीता और माता रानी ने उसकी पुकार सुन ली। उसके घर एक बेटे का जन्म हुआ। यही बच्चा आगे चलकर भारतीय सिनेमा का एक ऐसा सितारा बना, जिसकी अदाकारी आज भी मिसाल मानी जाती है। उसने फिल्म शोले में ठाकुर बलदेव सिंह के किरदार को अमर कर दिया।

हम बात कर रहे हैं संजीव कुमार की और आज उनकी 88वीं बर्थ एनिवर्सरी पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ अनसुने किस्से….

किस्सा-1

संजीव कुमार के पिता ने तीन शादियां की थीं संजीव कुमार के पिता जेठालाल शिवलाल जरीवाला गुजरात के सूरत के एक संपन्न जरी व्यापारी थे। उनके परिवार के पास आलीशान हवेली, घोड़ा-गाड़ी और उस दौर की तमाम शान-ओ-शौकत थी, लेकिन इतनी संपत्ति होने के बावजूद उनकी निजी जिंदगी में कई दुख आए।

संजीव कुमार के भतीजे उदय जरीवाला की किताब संजीव कुमार: द एक्टर वी ऑल लव्ड के अनुसार, जेठालाल की पहली शादी से दो बेटियां लक्ष्मी और जसु हुईं। कुछ समय बाद उनकी पहली पत्नी का बीमारी के कारण निधन हो गया। इसके बाद उन्होंने दूसरी शादी की। दूसरी पत्नी ने एक बेटी भगवती को जन्म दिया, लेकिन प्रसव के दौरान उनका भी निधन हो गया।

इसके बाद जेठालाल की तीसरी शादी शांता बेन से हुई। शांता बेन की सबसे बड़ी इच्छा थी कि परिवार को एक बेटा मिले। इसके लिए वह महाराष्ट्र-गुजरात सीमा पर स्थित चारोटी के माता मंदिर में जाकर मन्नत मांगती थीं। उन्होंने प्रण लिया कि यदि बेटा हुआ, तो उसे 10 साल तक दान में मिले कपड़े उसे पहनाएंगी और उसका मुंडन भी उसी मंदिर में कराएंगी।

करीब पांच साल बाद उनकी मन्नत पूरी हुई और 9 जुलाई 1938 को हरिहर जरीवाला का जन्म हुआ। यही हरिहर आगे चलकर हिंदी सिनेमा के मशहूर अभिनेता संजीव कुमार के नाम से पहचाने गए।

किस्सा-2

कैसे हरिहर जरीवाला बने संजीव कुमार संजीव कुमार को उनका नाम संजीव कुमार देने का श्रेय फिल्ममेकर सावन कुमार टाक को जाता है। 1960 के दशक की शुरुआत में सावन कुमार ने मुंबई के तेजपाल थिएटर में इप्टा (IPTA) का एक नाटक देखा। उस नाटक में संजीव कुमार की दमदार एक्टिंग ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि उन्होंने वहीं तय कर लिया कि वे उन्हें अपनी फिल्म में मौका देंगे।

नाटक खत्म होने के बाद उन्होंने संजीव कुमार को चाय पर बुलाया और अपनी फिल्म ‘नौनिहाल’ की कहानी सुनाने लगे। कहानी सुनते-सुनते संजीव कुमार ने हैरानी से पूछा, “आप मुझे यह कहानी क्यों सुना रहे हैं?”

सावन कुमार ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “क्योंकि मैं तुम्हें अपनी फिल्म में लेना चाहता हूं।”

हालांकि, सावन कुमार की एक शर्त थी। उन्होंने कहा कि हरिहर जरीवाला नाम फिल्मों के लिए उतना प्रभावशाली नहीं लगता। उस दौर में राज कुमार, दिलीप कुमार, मनोज कुमार और राजेंद्र कुमार जैसे कलाकारों का नाम खूब चल रहा था। इसलिए उन्होंने पहले संजय कुमार नाम सुझाया, लेकिन उसी समय एक्टर संजय खान भी इंडस्ट्री में आ चुके थे। ऐसे में दोनों ने मिलकर नया नाम चुना-संजीव कुमार।

किस्सा-3

फिल्म के सेट पर सबके सामने नूतन ने थप्पड़ जड़ा था

संजीव कुमार का नाम एक्ट्रेस नूतन से भी जुड़ा। संजीव कुमार और नूतन की मुलाकात 1968 में फिल्म ‘गौरी’ के सेट पर हुई और बाद में ‘देवी’ की शूटिंग के दौरान उनकी दोस्ती और गहरी हो गई।

पत्रकार हनीफ जवेरी ने विक्की ललवानी को दिए इंटरव्यू में बताया था कि एक दिन नूतन और उनके पति रजनीश बहल के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया। संजीव कुमार ने हालात संभालने की नीयत से रजनीश बहल को फोन किया था, लेकिन इसका उल्टा असर हुआ और उनके पति का गुस्सा और बढ़ गया।

अगले दिन अपने पति को यह भरोसा दिलाने के लिए कि उनका संजीव कुमार से कोई रिश्ता नहीं है, नूतन शूटिंग के सेट पर पहुंचीं और संजीव कुमार को थप्पड़ मारा था। इस घटना से फिल्म ‘देवी’ की शूटिंग रुक गई और दोनों कलाकार अलग-अलग चले गए।

किस्सा-4

एक शर्त की वजह से हेमा मालिनी से शादी नहीं हो सकी

संजीव कुमार की अधूरी प्रेम कहानियों में सबसे चर्चित नाम हेमा मालिनी का है। दोनों का रिश्ता शादी तक पहुंचने की संभावना तक बन गई थी। हालांकि, एक शर्त ने इस रिश्ते को हमेशा के लिए खत्म कर दिया। 1972 में फिल्म ‘सीता और गीता’ की शूटिंग के दौरान संजीव कुमार और हेमा मालिनी के बीच नजदीकियां बढ़ीं।

पत्रकार हनीफ जवेरी के मुताबिक, संजीव कुमार हेमा मालिनी को लेकर काफी सीरियस थे। दोनों के परिवारों के बीच शादी की बात भी पहुंच गई थी, लेकिन यहीं एक शर्त ने रिश्ते को तोड़ दिया। हनीफ जवेरी के अनुसार, हेमा मालिनी की मां जया चक्रवर्ती चाहती थीं कि शादी के बाद भी उनकी बेटी फिल्मों में काम करती रहे। वहीं, संजीव कुमार का साफ कहना था कि शादी के बाद उनकी पत्नी घर और परिवार को प्राथमिकता दे।

इसी मुद्दे पर दोनों के बीच सहमति नहीं बन सकी और रिश्ता टूट गया। उस समय हेमा मालिनी बॉलीवुड की नंबर-1 एक्ट्रेस थीं और अपने करियर के पीक पर थीं। हनीफ जवेरी का कहना है कि हेमा मालिनी को उम्मीद थी कि समय के साथ संजीव कुमार अपना फैसला बदल देंगे और उन्हें काम करने की अनुमति दे देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आखिरकार दोनों की राहें हमेशा के लिए अलग हो गईं। हेमा मालिनी से रिश्ता टूटने के बाद संजीव कुमार भीतर ही भीतर टूट गए थे।