शुरुआती 15 दिन में कमजोर रहा मानसून
जून से सितंबर के महीने में देश में दक्षिण-पश्चिमी मानसून के चलते बारिश होती है। पूरे साल की 70-80% बारिश इसी मानसून से होती है। आमतौर पर 1 जून को मानसून केरलम के रास्ते देश में आता है। फिर तेजी से आगे बढ़ता है और जून के आखिर तक उत्तर प्रदेश, दिल्ली और आसपास के इलाकों तक पहुंच जाता है। 15 जुलाई तक पूरे देश में मानसून आ जाता है। हालांकि मानसून समय पर आ जाए, तो भी जरूरी नहीं कि बारिश अच्छी होगी। इस बार यही हुआ। मानसून जैसे-जैसे आगे बढ़ा, कमजोर होता गया।
इस बार भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, यानी IMD ने 3 दिन की देरी से 4 जून को मानसूनी हवाओं के केरल तट पर टकराने की घोषणा की।
शुरुआती मानसून के चलते 1 से 17 जून देश में औसत से 38% कम बारिश हुई। यानी सामान्य 80.6 मिमी बारिश के मुकाबले 48.5 मिमी बारिश हुई। मध्य भारत में सबसे ज्यादा 62% की कमी रही। यहां 73.5 मिमी के मुकाबले 27 मिमी बारिश हुई।
मौसम विज्ञानी नवदीप दहिया के मुताबिक, ‘17 जून की सुबह की सैटेलाइट तस्वीरों में मानसून की स्थिति कमजोर दिख रही है। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बारिश वाले बादल बेहद कम हैं। 23 जून से पहले इस स्थिति में तेजी से सुधार होने की संभावना नहीं है।
IMD ने भी कहा है कि अगले 4 से 5 दिनों में मानसून ओडिशा, झारखंड और बिहार के ज्यादातर हिस्सों और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ सकता है। लेकिन 24 जून तक ये कमजोर ही बना रहेगा।
देश के ज्यादातर हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है। हालांकि दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत और उत्तर-पूर्वी राज्यों के कुछ हिस्से में अगले हफ्ते सामान्य बारिश होगी।
वहीं IMD मुंबई के मुताबिक, 24 और 25 जून के आसपास कोंकण में कुछ बारिश की संभावना जता रहे हैं। हालांकि महाराष्ट्र के बाकी हिस्सों में बारिश की संभावना बेहद कम है।
नवनीत के मुताबिक, ‘अगर मानसून इतना ही कमजोर रहा, तो पूरे जून में बारिश की कमी 45% तक हो सकती है। जबकि इसी दौरान किसान खरीफ की फसलों की बुवाई करते हैं, जिसके लिए बारिश की जरूरत होती है।’