नीतू कपूर @68: डेट पर मां ने मारा था थप्पड़:शादी में हुई थीं बेहोश, ऋषि कपूर को लगा था- करियर बर्बाद हो गया

08 Jul 2025

बचपन में पिता का साया उठ जाने के बाद जिम्मेदारियों ने मासूम उम्र में ही उनके हाथों में किताबों की जगह फिल्मी स्क्रिप्ट थमा दी। कैमरे के सामने मुस्कुराती उस बच्ची ने कभी नहीं सोचा होगा कि एक दिन वह हिंदी सिनेमा की सबसे सफल अभिनेत्रियों में गिनी जाएगी।

लेकिन नीतू कपूर की जिंदगी सिर्फ स्टारडम की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, प्यार, त्याग और मजबूत इरादों का सफर है। ऋषि कपूर के साथ रिश्ते की खबर पर मां का थप्पड़, शादी के दिन दूल्हा-दुल्हन का बेहोश हो जाना, शादी के बाद ऋषि कपूर का यह कहना कि उनके करियर पर इसका असर पड़ा, और फिर परिवार के लिए नीतू का फिल्मों से दूरी बना लेना, उनकी जिंदगी के ये किस्से आज भी खूब चर्चा में रहते हैं।

26 साल बाद जब उन्होंने फिल्मों में वापसी की, तो अपनी दमदार एक्टिंग से एक बार फिर दर्शकों का दिल जीत लिया।

बचपन में ही पिता का साया उठ गया

8 जुलाई 1958 को दिल्ली में जन्मीं नीतू कपूर का असली नाम हरमीत कौर था। वह पंजाबी सिख परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके जन्म के बाद परिवार मुंबई शिफ्ट हो गया था। बचपन में ही पिता का साया उठ गया। इसके बाद परिवार की माली हालत बिगड़ गई और दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो गया।

ऐसे में राजी कौर ने फिल्मों में काम पाने की कोशिश की, लेकिन बार-बार रिजेक्शन मिला। उन्हें एहसास हुआ कि उनके लिए अब देर हो चुकी है। इसके बाद उन्होंने अपना अधूरा सपना बेटी नीतू के जरिए पूरा करने का फैसला किया।

राजी नन्ही नीतू को लेकर फिल्म स्टूडियोज के चक्कर लगाने लगीं। शुरुआत में उन्हें फिर रिजेक्शन मिला, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी।

‘बेबी सोनिया’ के नाम से शुरू हुआ अभिनय का सफर

नीतू कपूर ने महज आठ साल की उम्र में फिल्मों में कदम रखा था। शुरुआती दौर में वह ‘बेबी सोनिया’ नाम से जानी जाती थीं। बाल कलाकार के रूप में उन्होंने फिल्म ‘सूरज’ (1966) से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। इसके बाद उन्होंने ‘दस लाख’, ‘दो कलियां’, ‘दो दूनी चार’ और ‘वारिस’ जैसी कई फिल्मों में काम किया और अपनी मासूमियत से दर्शकों का दिल जीत लिया।

हालांकि, उस समय उनकी मां बाल कलाकार के रूप में नीतू को मिल रही लोकप्रियता से खुश नहीं थीं। उस दौर में बाल कलाकारों के लिए अभिनय आसान नहीं माना जाता था, लेकिन नीतू कैमरे के सामने बिल्कुल सहज रहती थीं। निर्देशक उनकी संवाद अदायगी और भाव-भंगिमाओं से प्रभावित रहते थे। लगातार काम करते-करते उन्होंने अभिनय की बारीकियां सीख लीं।